छत्तीसगढ़

बिहान समूह महिलाओं की आत्मनिर्भरता की मिसाल : संजय बैस

बालोद छत्तीसगढ़ l

कुसुमकसा में आयोजित हुआ “दीदी के गोट” कार्यक्रम

कुसुमकसा, बालोद। छत्तीसगढ़ राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन (बिहान) के अंतर्गत नया सवेरा महिला संकुल संगठन कुसुमकसा द्वारा बुधवार को “दीदी के गोट” कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में पूर्व जनपद सदस्य संजय बैस शामिल हुए। इस अवसर पर ग्राम पंचायत प्रतिनिधि संतोष जैन एवं पंकज जेठवानी भी उपस्थित रहे।

मुख्य अतिथि का स्वागत एवं कार्यक्रम का शुभारंभ

कार्यक्रम की शुरुआत दीदियों द्वारा मुख्य अतिथि का पुष्पगुच्छ भेंट कर स्वागत करने के साथ हुई। इसके पश्चात दीप प्रज्वलन कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया गया। मंच पर स्वयं सहायता समूहों की पदाधिकारी एवं बिहान समूह की सक्रिय दीदियां मौजूद रहीं।

बिहान महिलाओं की एकता और सशक्तिकरण का माध्यम

मुख्य अतिथि संजय बैस ने अपने संबोधन में कहा कि बिहान समूह आज केवल बचत और ऋण तक सीमित नहीं है, बल्कि यह महिलाओं की एकता, आत्मनिर्भरता और सामाजिक सशक्तिकरण का मजबूत माध्यम बन चुका है। उन्होंने कहा कि संगठित महिलाएं परिवार और समाज के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है

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“दीदी के गोट” कार्यक्रम के दौरान बिहान समूह से जुड़ी महिलाओं ने अपने अनुभव साझा किए। उन्होंने बताया कि समूह से जुड़ने के बाद उन्हें आर्थिक रूप से मजबूत बनने का अवसर मिला और उन्होंने छोटे-छोटे व्यवसाय शुरू कर परिवार की आय में वृद्धि की है। कार्यक्रम में महिलाओं ने सामूहिक गीत और संवाद के माध्यम से अपनी बात रखी।

पंचायत प्रतिनिधियों ने दिया सहयोग का भरोसा

ग्राम पंचायत प्रतिनिधि संतोष जैन और पंकज जेठवानी ने महिलाओं के कार्यों की सराहना करते हुए कहा कि पंचायत स्तर पर महिलाओं को आगे बढ़ाने के लिए हर संभव सहयोग दिया जाएगा। उन्होंने बिहान समूह की गतिविधियों को ग्रामीण विकास के लिए महत्वपूर्ण बताया।

बड़ी संख्या में शामिल हुईं महिलाएं

कार्यक्रम के अंत में संकुल संगठन की ओर से सभी अतिथियों एवं उपस्थित महिलाओं का आभार व्यक्त किया गया। इस अवसर पर नया सवेरा महिला संकुल संगठन की अध्यक्ष धनमत गांवडे, सचिव आरती पांडे, पीआरपी आरती वत्सल, कविता रामटेके, अमाय नागवंशी सहित बड़ी संख्या में बिहान समूह की महिलाएं एवं ग्रामीणजन उपस्थित रहे।

जागरूकता संदेश

महिलाओं की आर्थिक आत्मनिर्भरता ही सशक्त समाज की नींव है। स्वयं सहायता समूहों से जुड़कर महिलाएं रोजगार, बचत, स्वरोजगार और नेतृत्व क्षमता विकसित कर सकती हैं। संगठित महिला शक्ति गांव और समाज के विकास की सबसे बड़ी ताकत है।

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