
बजट से युवाओं-किसानों में निराशा
इंद्रशाह मंडावी ने छत्तीसगढ़ सरकार के बजट 2026-27 को प्रदेश के युवाओं और किसानों के लिए निराशाजनक बताया है। उन्होंने कहा कि ट्रिपल इंजन सरकार से प्रदेशवासियों को जो उम्मीद थी, बजट उसके विपरीत प्रस्तुत किया गया है।
बस्तर-सरगुजा पर फोकस, जिले की उपेक्षा
विधायक मंडावी ने आरोप लगाया कि पूरे बजट में बस्तर और सरगुजा क्षेत्र पर विशेष ध्यान दिया गया है, जबकि मोहला-मानपुर-अंबागढ़ चौकी जैसे आदिवासी बाहुल्य जिले की अनदेखी की गई है। क्षेत्र की कई जायज मांगों को बजट में स्थान नहीं मिला।
घोषणाएं, पर प्रावधान नहीं
उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री द्वारा सीतागांव में मक्का प्रोसेसिंग यूनिट और मानपुर में अंतर्राज्यीय बस स्थानक की घोषणा की गई थी, लेकिन बजट में इसके लिए कोई राशि प्रावधानित नहीं की गई। खड़गांव में पॉलिटेक्निक महाविद्यालय की मांग भी प्राथमिकता से बाहर रही।
रसोइयों की हड़ताल, बच्चों पर असर
लंबे समय से स्कूल रसोइया हड़ताल पर हैं, जिससे बच्चों को सूखा अनाज दिया जा रहा है। विधायक ने कहा कि सरकार ने इस गंभीर मुद्दे पर भी ध्यान नहीं दिया।
रोजगार पर नहीं ठोस रोडमैप
विधायक मंडावी ने कहा कि 35 हजार शिक्षकों की भर्ती की घोषणा के बावजूद अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। बीएड अभ्यर्थी और संविदा कर्मचारी हड़ताल पर हैं, लेकिन बजट में उनके समाधान का उल्लेख नहीं है। युवाओं को स्थायी रोजगार देने के लिए स्पष्ट योजना का अभाव है।
किसान और मध्यम वर्ग दबाव में
उन्होंने कहा कि किसान धान खरीदी में पारदर्शिता, बढ़ती महंगाई से राहत और बिजली दरों में नियंत्रण की उम्मीद कर रहे थे, लेकिन बजट में इन मुद्दों पर प्रभावी पहल नजर नहीं आती। छोटे व्यापारी और मध्यम वर्ग आर्थिक दबाव में हैं।
ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर अस्पष्टता
मोहला-मानपुर क्षेत्र कृषि एवं वनोपज आधारित आय पर निर्भर है, लेकिन सिंचाई विस्तार, ग्रामीण सड़कों के सुदृढ़ीकरण, स्वास्थ्य सुविधाओं के उन्नयन और स्थानीय उद्योगों के प्रोत्साहन के लिए कोई स्पष्ट प्रावधान सामने नहीं आया।
वादों पर अमल नहीं
विधायक ने आरोप लगाया कि चुनाव के दौरान 500 रुपये में गैस सिलेंडर देने का वादा किया गया था, लेकिन बजट में इसका उल्लेख तक नहीं है। उन्होंने कहा कि यह बजट आंकड़ों का दस्तावेज अधिक और जमीनी समस्याओं के समाधान से दूर प्रतीत होता है।




