
राजनांदगांव। प्रदेश कांग्रेस कमेटी के राजनांदगांव आईटी सेल लोकसभा अध्यक्ष शुभम शुक्ला ने राज्य सरकार के हालिया बजट को युवाओं के भविष्य के साथ भद्दा मजाक करार दिया है। उन्होंने कहा कि विधानसभा में प्रस्तुत छत्तीसगढ़ सरकार का बजट पूरी तरह दिशाहीन और युवाओं को ठगने वाला है।
1 करोड़ में एक कॉलेज?
शुभम शुक्ला ने कहा कि बजट में 25 करोड़ रुपये की लागत से 25 नए कॉलेज खोलने का प्रावधान किया गया है। यानी एक कॉलेज के लिए मात्र 1 करोड़ रुपये। उन्होंने सवाल उठाया कि क्या इतनी राशि में भवन, लैब, लाइब्रेरी और फर्नीचर तैयार किया जा सकता है? इसे उन्होंने केवल कागजी घोषणा बताया।
गुणवत्ता से समझौता
उन्होंने कहा कि आज एक अच्छी प्राइमरी स्कूल भवन निर्माण में ही करोड़ों रुपये खर्च हो जाते हैं। ऐसे में मात्र 1 करोड़ में कॉलेज खोलने की घोषणा छात्रों के भविष्य के साथ खिलवाड़ है।
पुराने कॉलेजों की अनदेखी
शुभम शुक्ला ने आरोप लगाया कि सरकार नए कॉलेजों की घोषणा तो कर रही है, लेकिन पुराने कॉलेजों के जर्जर भवनों और शिक्षकों की कमी दूर करने के लिए कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है।
स्वास्थ्य बजट पर सवाल
उन्होंने कहा कि बजट में बड़े प्रोजेक्ट्स और नई बिल्डिंगों की घोषणा की गई है, लेकिन धरातल पर स्वास्थ्य सुविधाएं दम तोड़ रही हैं। प्रदेश के मेडिकल कॉलेजों में सीनियर रेजिडेंट डॉक्टरों के 72 प्रतिशत पद खाली पड़े हैं।
डॉक्टरों के हजारों पद रिक्त
शुक्ला ने दावा किया कि मेडिकल कॉलेजों में डॉक्टरों के 1290 पद खाली हैं। जिला अस्पताल, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र और अन्य संस्थानों में विशेषज्ञ व पैरामेडिकल स्टाफ के हजारों पद रिक्त हैं, लेकिन इन्हें भरने के लिए बजट में कोई विशेष प्रावधान नहीं किया गया।
ग्रामीण स्वास्थ्य की उपेक्षा
उन्होंने कहा कि ग्रामीण और वनांचल क्षेत्रों में प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र (PHC) और उपकेंद्र जर्जर स्थिति में हैं। कई स्थानों पर भवनों की हालत खराब है और बुनियादी दवाइयों का अभाव है, फिर भी सरकार नई इमारतों का सपना दिखा रही है।
अस्पताल बने रेफरल सेंटर
शुक्ला के अनुसार, प्रदेश के अधिकांश अस्पताल केवल रेफरल सेंटर बनकर रह गए हैं, जहां प्राथमिक उपचार के बाद मरीजों को निजी अस्पतालों में भेज दिया जाता है। मल्टी-स्पेशलिटी सुविधाओं के विस्तार के लिए बजट में पर्याप्त प्रावधान नहीं है।
युवाओं के साथ दोहरा अन्याय
अंत में उन्होंने कहा कि एक ओर 25 करोड़ में 25 कॉलेज खोलने की घोषणा और दूसरी ओर स्वास्थ्य सेवाओं में कथित ‘कंजूसी’ युवाओं और आम जनता के साथ दोहरा अन्याय है। जब तक अस्पतालों में डॉक्टरों की नियुक्ति और आवश्यक मशीनों की व्यवस्था नहीं होगी, तब तक यह बजट केवल कागजी साबित होगा।




