छत्तीसगढ़राज्य

एनएचएम कर्मचारियों की हड़ताल से छत्तीसगढ़ में स्वास्थ्य सेवाएं ठप, सरकार पर ठीकरा

20 अगस्त 2025:

छत्तीसगढ़ में राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (एनएचएम) के 16,000 से अधिक कर्मचारी अपनी 10 सूत्रीय मांगों—जिनमें नियमितीकरण, ग्रेड पे, पब्लिक हेल्थ कैडर की स्थापना, और लंबित 27% वेतनवृद्धि शामिल हैं—को लेकर अनिश्चितकालीन हड़ताल पर हैं। इस आंदोलन के कारण प्रदेश की स्वास्थ्य व्यवस्था पूरी तरह चरमरा गई है, जिससे मरीजों को गंभीर परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।

बालोद में बीजेपी जिला कार्यालय में सौंपा गया ज्ञापन

जिला बालोद में हड़ताल के तीसरे दिन एनएचएम कर्मचारियों ने बालोद बस स्टैंड से जिला बीजेपी कार्यालय तक मार्च किया और जिला अध्यक्ष श्री चेमन देशमुख को ज्ञापन सौंपा। इस दौरान जिला अध्यक्ष श्री खिलेश साहू, संरक्षक श्री दिनेश खर्कवाल, उपाध्यक्ष श्री प्रेम यादव, जिला सचिव श्री यजेंद्र, पूर्व अध्यक्ष और संरक्षक रितेश साहू सहित सभी कर्मचारी उपस्थित थे। श्री देशमुख ने आश्वासन दिया कि वे शासन को कर्मचारियों की मांगों के संबंध में पत्राचार करेंगे। साथ ही, मध्य प्रदेश और राजस्थान में एनएचएम कर्मचारियों को मिले नियमितीकरण और अन्य लाभों की छायाप्रति सौंपी गई, ताकि छत्तीसगढ़ में भी इन नीतियों का अनुसरण कर मांगें पूरी की जा सकें।

कर्मचारियों की नाराजगी: सरकार की अनदेखी बनी कारण

प्रदेश अध्यक्ष डॉ. अमित मिरी और प्रदेश प्रवक्ता पूरन दास ने बताया कि कर्मचारियों ने कई बार मुख्यमंत्री, स्वास्थ्य मंत्री और वरिष्ठ अधिकारियों से मुलाकात कर अपनी जायज मांगें रखीं, लेकिन उनकी लगातार अनदेखी की गई। 27% वेतनवृद्धि, मेडिकल अवकाश, और ग्रेड पे पर स्वीकृति के बावजूद आदेश जारी नहीं किए गए, जिससे नाराज कर्मचारी हड़ताल पर उतर आए हैं।

हड़ताल से प्रभावित सेवाएं

हड़ताल के कारण प्रदेश की स्वास्थ्य सेवाएं बुरी तरह प्रभावित हुई हैं:

  • मरीजों को दवाइयाँ उपलब्ध नहीं हो रही हैं।

  • नवजात शिशु वार्ड और पोषण आहार केंद्र बंद हैं।

  • शुगर, ब्लड टेस्ट, ट्रूनाट, सीबीनाट से बलगम टेस्ट और नेत्र जाँच पूरी तरह बाधित हैं।

  • स्कूल और आंगनबाड़ी स्वास्थ्य परीक्षण ठप हैं।

  • रूटीन टीकाकरण बंद है।

  • टीबी, मलेरिया, और कुष्ठ जैसे रोगों के मरीजों को दवाइयाँ नहीं मिल रही हैं।

सुदूर ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों के कई अस्पतालों में अव्यवस्था बढ़ गई है, और कुछ अस्पताल पूरी तरह बंद होने की कगार पर हैं।

कर्मचारी संघ की चेतावनी

कर्मचारी संघ ने सरकार को स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि उनकी मांगों पर जल्द ठोस निर्णय नहीं लिया गया, तो आंदोलन को और उग्र किया जाएगा। उन्होंने कहा कि इसके परिणामों की जिम्मेदारी पूरी तरह शासन की होगी।

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button
error: Content is protected !!