
कुसुमकसा |
“माता-पिता की सेवा संतान का धर्म है, लेकिन उनके देहावसान के बाद उनके नाम पर समाज के अंतिम व्यक्ति की सेवा करना ही सच्ची पितृ-भक्ति है।”
इस कथन को कुसुमकसा क्षेत्र में पूर्व जनपद सदस्य संजय बैस ने अपने आचरण से साकार कर दिखाया है।
अपने पिता की प्रथम पुण्यतिथि के अवसर पर संजय बैस ने केवल श्रीमद्भागवत ज्ञान यज्ञ सप्ताह का आयोजन ही नहीं किया, बल्कि सेवा और परोपकार का ऐसा दीप जलाया, जिससे सैकड़ों जरूरतमंदों के जीवन में उजाला आया।
695 लोगों की हुई नेत्र जांच, 270 को मिला निशुल्क चश्मा
पुण्यतिथि के अवसर पर आयोजित विशाल निःशुल्क नेत्र जांच शिविर में कुल 695 लोगों की आंखों की जांच की गई। इनमें से
270 जरूरतमंदों को निःशुल्क चश्मा प्रदान किया गया 168 मरीजों का मोतियाबिंद ऑपरेशन कराया जाना तय हुआ
पहली किस्त में 60 लोगों का सफल ऑपरेशन
पहले चरण में 29 दिसंबर को 60 मरीजों को लेकर संजय बैस स्वयं रायपुर स्थित गणेश विनायक अस्पताल पहुंचे। सभी मरीजों का सफल ऑपरेशन कराया गया और ऑपरेशन के बाद 60 मरीजों को सुरक्षित कुसुमकसा वापस लाया गया, जहां उनका भव्य स्वागत किया गया।
2 जनवरी को पुनः 60 मरीजों को ऑपरेशन हेतु रायपुर ले जाया जाएगा अंतिम चरण में 48 मरीजों का ऑपरेशन कराया जाएगा इस प्रकार कुल 168 लोगों को मोतियाबिंद से मुक्ति मिलेगी।
बैस परिवार ने उठाया पूरा खर्च
इस सेवा कार्य की सबसे बड़ी विशेषता यह रही कि मरीजों को घर से अस्पताल ले जाना अस्पताल में ठहराव भोजन, दवाइयां और ऑपरेशन का पूरा खर्च बैस परिवार द्वारा स्वयं वहन किया गया।
मरीजों को अस्पताल में किसी प्रकार की असुविधा न हो, इसके लिए विशेष पहचान पत्र भी पहनाए गए।
मरीजों की आंखें ही नहीं, दिल भी भर आए
ऑपरेशन कराकर लौटीं जयंती बाई नेताम ने भावुक होते हुए कहा—
“संजय बैस ने एक बेटे का फर्ज निभाया है। इलाज, आने-जाने और खाने-पीने की इतनी अच्छी व्यवस्था थी कि हमें घर से बाहर होने का एहसास ही नहीं हुआ।”
वहीं, मरीज अनुपा ने कहा—
“भागवत कथा के साथ इतना बड़ा नेत्र शिविर और फिर खुद के खर्च पर रायपुर ले जाकर इलाज कराना वास्तव में एक महान और प्रेरणादायी कार्य है।”
गणेश विनायक अस्पताल रायपुर का रहा पूर्ण सहयोग
इस पूरे सेवा अभियान में गणेश विनायक अस्पताल, रायपुर का भी सराहनीय सहयोग रहा, जहां विशेषज्ञ चिकित्सकों द्वारा सफलतापूर्वक ऑपरेशन किए गए।




