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एकात्म मानववाद और अंत्योदय आज भी प्रासंगिक

राजनांदगाव छत्तीसगढ़

राजनांदगांव।

नगर निगम भाजपा के वरिष्ठ पार्षद शिव वर्मा ने कहा कि भारत के महान विचारक, प्रखर राष्ट्रवादी नेता एवं भारतीय जनसंघ के प्रमुख स्तंभ पंडित दीनदयाल उपाध्याय की पुण्यतिथि (11 फरवरी 1968) को पूरे देश में समर्पण दिवस के रूप में मनाया जाता है। यह दिन उनके द्वारा प्रतिपादित एकात्म मानववाद और अंत्योदय के सिद्धांतों को आत्मसात करने तथा राष्ट्र सेवा का संकल्प लेने का अवसर प्रदान करता है।

उन्होंने कहा कि पंडित दीनदयाल उपाध्याय का जीवन त्याग, तपस्या और राष्ट्र समर्पण का अद्वितीय उदाहरण था। उन्होंने भारतीय संस्कृति और परंपराओं पर आधारित विकास की ऐसी विचारधारा प्रस्तुत की, जिसमें व्यक्ति, समाज और राष्ट्र के समग्र विकास की अवधारणा निहित है।

श्री वर्मा ने कहा कि एकात्म मानववाद केवल एक राजनीतिक दर्शन नहीं, बल्कि भारतीय जीवन दृष्टि का सार है, जो संतुलित और समरस समाज के निर्माण की प्रेरणा देता है। पंडित जी द्वारा दिया गया अंत्योदय का सिद्धांत आज भी उतना ही प्रासंगिक है, जिसका उद्देश्य समाज के अंतिम व्यक्ति को मुख्यधारा में लाना है।

उन्होंने कहा कि सरकार की विभिन्न जनकल्याणकारी योजनाएं इसी भावना से प्रेरित हैं, जिनका लक्ष्य गरीब, किसान, मजदूर और वंचित वर्गों को सशक्त बनाना है। समर्पण दिवस केवल श्रद्धांजलि का दिन नहीं, बल्कि समाज के कमजोर वर्गों के कल्याण और सामाजिक न्याय के प्रति अपने दायित्वों को दोहराने का अवसर है।

अंत में उन्होंने कार्यकर्ताओं एवं नागरिकों से आह्वान किया कि वे पंडित दीनदयाल उपाध्याय के आदर्शों को अपने जीवन में अपनाएं और राष्ट्रहित को सर्वोपरि रखते हुए सेवा कार्यों में सक्रिय भूमिका निभाएं। उन्होंने कहा कि उनके आदर्शों को व्यवहार में उतारकर ही सच्ची श्रद्धांजलि दी जा सकती है।

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