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आर-पार की लड़ाई: छत्तीसगढ़ में कलम बंद–काम बंद हड़ताल, ठप्प हुआ सरकारी कामकाज सरकारी दफ्तरों में लटके ताले, सड़कों पर उतरे अधिकारी-कर्मचारी

राजनांदगांव छत्तीसगढ़

राजनांदगांव।

छत्तीसगढ़ अधिकारी-कर्मचारी फेडरेशन के आह्वान पर तीसरे चरण के आंदोलन के तहत आज जिले में कलम बंद–काम बंद हड़ताल का व्यापक असर देखने को मिला। राजनांदगांव शहर के फ्लाईओवर के नीचे फेडरेशन के बैनर तले अधिकारी और कर्मचारी अपनी मांगों को लेकर सड़क पर उतर आए।

राजस्व से शिक्षा विभाग तक ठप रहा कामकाज

हड़ताल में राजस्व, शिक्षा विभाग, कलेक्ट्रेट, तहसील सहित सभी प्रमुख विभागों के अधिकारी-कर्मचारी शामिल रहे। शासकीय कार्यालयों के बाहर ताले लटके रहे, अंदर खाली कुर्सियां और सूनी मेजें सरकारी कामकाज के पूरी तरह ठप होने की गवाही देती रहीं। जिला स्तर पर कर्मचारियों की भीड़ और नारेबाजी के दृश्य नजर आए।

जनता को हुई परेशानी, शासकीय कार्य प्रभावित

हड़ताल के चलते शासकीय दफ्तरों में सन्नाटा पसरा रहा, जिससे आम जनता को प्रमाण-पत्र, राजस्व और अन्य जरूरी कार्यों के लिए भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ा।

स्कूलों में लौटी मायूसी, बच्चे लौटे घर

शीतकालीन अवकाश समाप्त होने के बाद नई उमंग और उत्साह के साथ स्कूल पहुंचे बच्चे, शिक्षकों की हड़ताल के कारण मायूस होकर घर लौटते नजर आए।

परेशान छात्र-छात्राओं ने कहा कि आए दिन हो रही हड़तालों से उनकी पढ़ाई पूरी तरह प्रभावित हो रही है। उन्होंने सरकार और शिक्षकों से आपसी बातचीत के जरिए समाधान निकालने की अपील की।

मोदी की गारंटी की 11 मांगों पर अड़े कर्मचारी

फेडरेशन का कहना है कि जब तक मोदी की गारंटी में शामिल 11 मांगों पर सरकार सहमति नहीं बनाती, तब तक आंदोलन जारी रहेगा। तीन दिवसीय हड़ताल के चलते जिले की शासकीय व्यवस्था चरमरा गई है।

आंदोलन और उग्र होगा: सतीश ब्योहारे

छत्तीसगढ़ अधिकारी-कर्मचारी फेडरेशन के जिला संयोजक सतीश ब्योहारे ने चेतावनी देते हुए कहा कि

“यदि सरकार हमारी 11 मांगों पर सहमति नहीं बनाती है, तो आने वाले दिनों में आंदोलन और उग्र होगा। जरूरत पड़ी तो आर-पार की लड़ाई लड़ी जाएगी।”

जिला संयोजक, छत्तीसगढ़ अधिकारी-कर्मचारी फेडरेशन, राजनांदगांव

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