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कुपोषण के खिलाफ मिसाल: जनपद सदस्य मंजू बैंस ने कुपोषित बच्ची को गोद लेकर बनाया सुपोषित

छत्तीसगढ़ (बालोद)

महिला एवं बाल विकास विभाग द्वारा कुपोषित बच्चों की पहचान कर जनप्रतिनिधियों से उन्हें गोद लेकर सुपोषित करने का आह्वान किया गया था। इसी पहल को आगे बढ़ाते हुए जनपद सदस्य मंजू बैंस ने मानवता की मिसाल पेश की है। उन्होंने कुसुमकसा की गंभीर कुपोषित वेस्टिंग कैटेगरी में आने वाली नन्ही बालिका तेविशा को गोद लेकर उसकी जीवन यात्रा बदल दी।

गोद लेने के समय बेटी का वजन काफी कम था और लम्बाई भी सामान्य बच्चों की तुलना में नहीं बढ़ रही थी। बच्ची के माता-पिता श्रीमती यशोदा और राघवेंद्र अपनी बेटी की सेहत को लेकर लगातार चिंतित थे। ऐसे समय में जनपद सदस्य मंजू बैंस दूसरी अभिभावक बनकर आगे आईं और कुपोषण के खिलाफ जंग शुरू की।

महिला एवं बाल विकास विभाग की सतत निगरानी में बच्ची के लिए विशेष डाइट चार्ट तैयार किया गया। विटामिन व प्रोटीन से भरपूर आहार के साथ आवश्यक दवाइयाँ भी नियमित रूप से उपलब्ध कराई गईं। निरंतर देखभाल और प्रयासों का परिणाम यह हुआ कि आज बेटी तेविशा सामान्य श्रेणी में पहुँच गई है।

वर्तमान में बालिका का वजन 8 किलो और लम्बाई 65 सेमी हो गई है। पहले जिन चिंताओं ने परिवार को घेर रखा था, वे अब खत्म हो चुकी हैं। बच्ची के माता-पिता ने जनपद सदस्य मंजू बैंस, डॉक्टरों और महिला एवं बाल विकास विभाग के प्रति आभार व्यक्त किया है।

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