
छत्तीसगढ़ के 16,500 एनएचएम कर्मचारियों को आज की कैबिनेट बैठक से बड़ी उम्मीदें थीं, लेकिन उनकी मांगों पर कोई ठोस निर्णय न होने से कर्मचारियों में गहरी मायूसी छा गई है। त्योहारी सीजन में आर्थिक तंगी का सामना कर रहे कर्मचारियों को हड़ताल अवधि के वेतन कटौती ने और निराश किया है।
छत्तीसगढ़ प्रदेश एनएचएम कर्मचारी संघ के बैनर तले 33 दिन की हड़ताल के बाद मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय, स्वास्थ्य मंत्री श्री श्याम बिहारी जायसवाल और भाजपा प्रदेश अध्यक्ष श्री किरण सिंह देव के हस्तक्षेप से आंदोलन स्थगित हुआ था। हड़ताल के दौरान 10 मांगों में से 4 पर तत्काल आदेश जारी हुए थे, जबकि ग्रेड पे, अनुकंपा नियुक्ति और स्थानांतरण नीति पर 3 माह की समयसीमा तय की गई थी। मुख्यमंत्री ने 25 बर्खास्त कर्मचारियों की बहाली और हड़ताल अवधि का वेतन देने का आश्वासन भी दिया था, लेकिन इन पर कोई प्रगति नहीं हुई।
कर्मचारियों की प्रमुख मांगें:
1. संविलियन एवं स्थायीकरण
2. ग्रेड पे या वेतनमान निर्धारण
3. पब्लिक हेल्थ अकादमी और कैडर की स्थापना
4. कार्यमूल्यांकन में पारदर्शिता
5. 27% लंबित वेतन वृद्धि
6. नियमित भर्ती में सीटों का आरक्षण
7. अनुकंपा नियुक्ति
8. मेडिकल एवं अन्य अवकाश सुविधा
9. स्थानांतरण नीति
10. 10 लाख तक की कैशलेस चिकित्सा बीमा
वेतन कटौती से त्योहारी खुशियाँ फीकी जहाँ अन्य कर्मचारियों को त्योहारों में बोनस मिल रहा है, वहीं एनएचएम कर्मचारियों के 33 दिन के वेतन कटौती के आदेश ने उनकी खुशियों को कम कर दिया है। हड़ताल स्थगन के 10 दिन बाद भी 6 मांगों पर कोई आदेश जारी नहीं हुआ है। कर्मचारी इसे प्रशासनिक तानाशाही बता रहे हैं, खासकर जब सरकार ने उनकी मांगों को जायज और आंदोलन को संवैधानिक माना था।
संघ की अपील प्रदेश अध्यक्ष डॉ. अमित कुमार मिरी और प्रवक्ता पूरन दास ने कहा, “मुख्यमंत्री और स्वास्थ्य मंत्री से चर्चा के बाद आश्वासन मिला था कि 25 बर्खास्त कर्मचारियों की बहाली और हड़ताल अवधि का वेतन दिया जाएगा। लेकिन कैबिनेट बैठक में कोई सकारात्मक निर्णय न होने से कर्मचारी निराश हैं।” उन्होंने सरकार से मांग की कि 25 कर्मचारियों की बहाली, हड़ताल अवधि का वेतन और शेष मांगों पर तत्काल कार्रवाई की जाए।
क्या होगा आगे? त्योहारी मौसम में जहाँ पूरा प्रदेश उत्सव में डूबा है, वहीं एनएचएम कर्मचारी आर्थिक संकट से जूझ रहे हैं। अब देखना यह है कि क्या सरकार मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के सुशासन के वादे को पूरा करती है, या कर्मचारियों को एक बार फिर मायूसी हाथ लगती है।




