
छत्तीसगढ़ में राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (एनएचएम) के 16,000 से अधिक संविदा कर्मचारियों की अनिश्चितकालीन हड़ताल 19वें दिन भी जारी रही। नियमितीकरण, ग्रेड पे, 27% लंबित वेतन वृद्धि सहित 10 सूत्रीय मांगों को लेकर चल रहा यह आंदोलन दिन-ब-दिन उग्र होता जा रहा है।

कबड्डी के जरिए अनोखा प्रदर्शन
आज बालोद में एनएचएम कर्मचारियों ने सामूहिक इस्तीफा देने के बाद शासन और कर्मचारियों के बीच कबड्डी खेलकर विरोध प्रदर्शन किया। कर्मचारियों ने मुख्यमंत्री, स्वास्थ्य मंत्री, वित्त मंत्री, उपमुख्यमंत्री, केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री, और पूर्व मुख्यमंत्री के मुखौटे पहनकर यह अनोखा प्रदर्शन किया। इस कबड्डी मैच में महिला कर्मचारियों की भी भागीदारी रही। प्रदर्शन के अंत में एनएचएम कर्मचारियों की टीम विजयी रही, और उन्हें प्रतीकात्मक रूप से “नियमितीकरण की ट्रॉफी” प्रदान की गई।

कर्मचारियों का आरोप: शासन भ्रमित कर रहा
कर्मचारियों का कहना है कि शासन उनकी मांगों पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं कर रहा और केवल कोरे आश्वासन दिए जा रहे हैं। उन्होंने स्वास्थ्य मंत्री पर भ्रामक बयान देने का आरोप लगाया, जिसमें कहा गया कि मांगें पूरी हो चुकी हैं, लेकिन कोई लिखित आदेश जारी नहीं किया गया। कर्मचारियों ने यह भी बताया कि उन्होंने केंद्र सरकार से आरटीआई के जरिए जवाब मांगा था, जिसमें स्पष्ट हुआ कि कर्मचारियों का नियमितीकरण और वेतन वृद्धि राज्य सरकार का विषय है। फिर भी, शासन इस मुद्दे को केंद्र पर टाल रहा है।

स्वास्थ्य सेवाओं पर व्यापक असर
हड़ताल के कारण छत्तीसगढ़ में स्वास्थ्य सेवाएं पूरी तरह चरमरा गई हैं। शासकीय अस्पतालों में संस्थागत प्रसव, पैथोलॉजी जांच (खून, पेशाब, ट्रू-नाट, सीबीनाट), टीबी, कुष्ठ, मलेरिया जांच, ओपीडी, नवजात शिशु देखभाल, स्कूल और आंगनबाड़ी स्वास्थ्य परीक्षण, पोषण पुनर्वास केंद्र, एनसीडी स्क्रीनिंग, वृद्ध स्वास्थ्य परीक्षण, और आपातकालीन सेवाएं पूरी तरह ठप हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में स्थिति सबसे गंभीर है, जहां सामुदायिक स्वास्थ्य अधिकारी भी हड़ताल में शामिल हैं, जिसके चलते आयुष्मान आरोग्य मंदिरों की ओपीडी बंद है।
कर्मचारियों की मांगें
एनएचएम कर्मचारियों की 10 सूत्रीय मांगें निम्नलिखित हैं:
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नियमितीकरण/संविलियन
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पब्लिक हेल्थ कैडर की स्थापना
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ग्रेड पे का निर्धारण
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27% लंबित वेतन वृद्धि
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कार्य मूल्यांकन में पारदर्शिता
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नियमित भर्ती में आरक्षण
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अनुकंपा नियुक्ति
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मेडिकल और अन्य अवकाश सुविधा
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स्थानांतरण नीति
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न्यूनतम 10 लाख रुपये का चिकित्सा बीमा
सरकार पर टूटे वादों का आरोप
कर्मचारियों ने आरोप लगाया कि बीजेपी ने अपने घोषणा पत्र “मोदी की गारंटी” में वादा किया था कि 100 दिनों में कमेटी गठित कर कर्मचारियों की समस्याओं का समाधान किया जाएगा, लेकिन 20 महीने बीत जाने के बाद भी कोई कार्रवाई नहीं हुई। कर्मचारियों ने कहा कि पिछले 20 वर्षों से वे नियमितीकरण की मांग कर रहे हैं, लेकिन सरकारें केवल आश्वासन देती रही हैं।
सांसदों का समर्थन
सांसद विजय बघेल और बृजमोहन अग्रवाल ने एनएचएम कर्मचारियों की मांगों को जायज बताया है। उन्होंने मुख्यमंत्री, स्वास्थ्य मंत्री, और यदि आवश्यक हो तो केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जे.पी. नड्डा से बात करने का आश्वासन दिया है।
हड़ताल में शामिल प्रमुख लोग
आज के प्रदर्शन में जिला अध्यक्ष खिलेश साहू, उपाध्यक्ष प्रेम, संरक्षक दिनेश खर्कवाल, मीडिया प्रभारी चंदन गिरी, डॉ. दीप्ति साहू, भूपेश देवांगन, तोश, अनीता साहू, रंजना, नीमा, आकांक्षा, किरण, पीयूष, लोकेंद्र, डीकेश्वरी, रोशनी, सुनील, जीतेश्वरी साहू, रामेश्वरी सहित अन्य कर्मचारी शामिल थे।
सरकार की कार्रवाई और कर्मचारियों का जवाब
स्वास्थ्य विभाग ने हड़ताल को जनहित के खिलाफ बताते हुए “नो वर्क, नो पेमेंट” का आदेश जारी किया है और कई कर्मचारियों को बर्खास्त करने की चेतावनी दी है। हाल ही में 25 कर्मचारियों, जिसमें संगठन के प्रदेश संरक्षक हेमंत सिन्हा और महासचिव कौशलेश तिवारी शामिल हैं, को बर्खास्त कर दिया गया। कर्मचारियों ने इसे दबाव की रणनीति करार देते हुए कहा कि वे बिना नियमितीकरण के हड़ताल समाप्त नहीं करेंगे।
निष्कर्ष
एनएचएम कर्मचारियों की हड़ताल ने छत्तीसगढ़ की स्वास्थ्य व्यवस्था को गहरे संकट में डाल दिया है। कर्मचारियों का कहना है कि यह आंदोलन उनकी मजबूरी का नतीजा है, और वे तब तक पीछे नहीं हटेंगे जब तक उनकी मांगें लिखित रूप में पूरी नहीं हो जातीं। दूसरी ओर, सरकार ने सख्त रुख अपनाते हुए कार्रवाई शुरू कर दी है, जिससे यह गतिरोध और गहरा सकता है।




