
आज दिनांक 14 अगस्त 2025 को राजधानी रायपुर में छत्तीसगढ़ राजभाषा आयोग के कार्यालय स्थापना दिवस के अवसर पर एक भव्य गोष्ठी का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में रायपुर सांसद श्री बृजमोहन अग्रवाल और विधायक श्री अनुज शर्मा शामिल हुए। गोष्ठी में छत्तीसगढ़ की साहित्यिक और सांस्कृतिक धरोहर को समृद्ध करने वाले प्रख्यात साहित्यकारों को सम्मानित किया गया और आयोग द्वारा प्रकाशित महत्वपूर्ण पुस्तकों का विमोचन किया गया।
साहित्यकारों का सम्मान और पुस्तक विमोचन
कार्यक्रम में छत्तीसगढ़ी साहित्य और संस्कृति को बढ़ावा देने वाले सम्माननीय साहित्यकार डॉ. रमाकांत सोनी, डॉ. संतराम देशमुख, श्री गणेश यदु, श्री मनमोहन ठाकुर, श्री सनत तिवारी, और श्री हर प्रसाद “निडर” को सम्मानित किया गया। इसके साथ ही, छत्तीसगढ़ राजभाषा आयोग द्वारा प्रकाशित पुस्तकों का विमोचन भी किया गया, जो छत्तीसगढ़ी भाषा और संस्कृति को विश्व पटल पर पहचान दिलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगी।
स्वर्गीय सुरेंद्र दुबे को श्रद्धांजलि
इस अवसर पर छत्तीसगढ़ी भाषा को वैश्विक स्तर पर पहचान दिलाने वाले महान कवि स्वर्गीय सुरेंद्र दुबे जी को विनम्र श्रद्धांजललि अर्पित की गई। उनकी साहित्यिक उपलब्धियों और योगदान को याद करते हुए सभी उपस्थितजनों ने उन्हें नमन किया।
छत्तीसगढ़ी: हमारी संस्कृति की आत्मा
गोष्ठी में विधायक श्री अनुज शर्मा ने छत्तीसगढ़ी भाषा की महत्ता पर जोर देते हुए कहा, “छत्तीसगढ़ी सिर्फ एक भाषा नहीं, बल्कि हमारी संस्कृति, परंपरा और लोकजीवन की आत्मा है। इसमें हमारे लोकगीतों की मिठास, कहानियों की सरलता, और पीढ़ियों से चली आ रही लोकबुद्धि की गहराई समाई है। यह भाषा हमें हमारी जड़ों से जोड़ती है और आने वाली पीढ़ियों के लिए हमारी पहचान को सुरक्षित रखती है।”
उन्होंने सभी से अपील की कि छत्तीसगढ़ी भाषा का उपयोग परिवार, समाज और सार्वजनिक जीवन में अधिक से अधिक करें और अपनी राजभाषा का सम्मान करें। उन्होंने कहा, “राजभाषा व्यक्तित्व की पहचान कराती है। यह हमर आत्मबल अऊ गरब के भाव जगाथे।”
कार्यक्रम में उपस्थिति
इस आयोजन में रायपुर सांसद श्री बृजमोहन अग्रवाल, विधायक श्री अनुज शर्मा, श्री सुनील सोनी, श्री पुरंदर मिश्रा, श्री मोतीलाल साहू सहित प्रदेशभर से आए साहित्यकार, प्रबुद्धजन, और राजभाषा आयोग के अधिकारी-कर्मचारी उपस्थित रहे।
छत्तीसगढ़ी भाषा का महत्व
गोष्ठी में छत्तीसगढ़ी भाषा को विश्व स्तर पर बढ़ावा देने और इसके संरक्षण के लिए किए जा रहे प्रयासों पर भी चर्चा हुई। यह आयोजन छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक धरोहर को संजोने और नई पीढ़ी को इसके प्रति जागरूक करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम रहा।




