
शनिवार को बालोद जिला मुख्यालय के इनडोर स्टेडियम में विश्व आदिवासी दिवस समारोह धूमधाम से मनाया गया। इस अवसर पर जिले भर से आदिवासी समाज के पदाधिकारी और सैकड़ों लोग एकत्र हुए। दोपहर 12 बजे स्टेडियम से एक भव्य रैली निकाली गई, जिसमें पारंपरिक वेशभूषा में सजे युवाओं ने रेला-पाटा नृत्य की मनमोहक प्रस्तुति दी।

सांस्कृतिक विरासत को संजोने का प्रयास
समारोह को संबोधित करते हुए सर्व आदिवासी समाज बालोद के जिलाध्यक्ष तुकाराम कोर्राम ने कहा कि इस तरह के आयोजन युवा पीढ़ी को अपनी सांस्कृतिक जड़ों से जोड़ने और उन्हें अपनी विरासत को समझने का अवसर प्रदान करते हैं। उन्होंने जोर देकर कहा कि जब युवा अपनी परंपराओं से जुड़ते हैं, तब हम अपनी सांस्कृतिक धरोहर को संरक्षित और जीवंत रख पाते हैं।

विश्व आदिवासी दिवस का महत्व
जिला पंचायत सदस्य मिथलेश निरोटी ने बताया कि 9 अगस्त को विश्व आदिवासी दिवस पूरे विश्व में मनाया जाता है। यह दिन आदिवासी समुदायों को उनकी सांस्कृतिक धरोहर को संजोने और उसे बढ़ावा देने का अवसर देता है। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ सहित पूरे देश में यह पर्व उत्साह और गर्व के साथ मनाया जा रहा है।

रैली में माल्यार्पण और सम्मान
रैली के दौरान आदिवासी समाज के प्रमुख लोगों ने संविधान निर्माता बाबा साहब अम्बेडकर, छत्तीसगढ़ महतारी और शहीद वीर नारायण सिंह की प्रतिमाओं पर माल्यार्पण कर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की। इस अवसर पर समाज ने अपनी एकजुटता और सांस्कृतिक गौरव का प्रदर्शन किया।


प्रमुख हस्तियों की उपस्थिति
समारोह में जनपद अध्यक्ष डौंडी मुकेश कौड़ो, नगर पंचायत डौंडीलोहारा अध्यक्ष कुँवर लाल निवेंद्र सिंह टेकाम, नगर पालिका उपाध्यक्ष कमलेश सोनी, समाजसेवी चंद्रेश ठाकुर, प्रोफेसर मानकर सहित कई गणमान्य व्यक्ति और अधिकारी उपस्थित रहे।

यह आयोजन न केवल आदिवासी समाज की सांस्कृतिक धरोहर को उजागर करने का अवसर बना, बल्कि युवा पीढ़ी को अपनी जड़ों से जोड़ने और सामाजिक एकता को मजबूत करने का भी एक सशक्त माध्यम साबित हुआ।




