
राजनांदगांव।
नक्सल हिंसा से प्रभावित परिवारों का दर्द अब गुस्से में बदलता नजर आ रहा है। हफ्तों से थाना, एसपी कार्यालय, तहसील और कलेक्टर दफ्तर के चक्कर लगाने के बावजूद न तो FIR दर्ज हुई और न ही राहत से जुड़ी फाइलों में कोई प्रगति हुई। परेशान पीड़ित परिवारों ने अब सीधे विधानसभा अध्यक्ष Raman Singh के निवास की ओर कूच करने की चेतावनी दी है।
जिले में ही भटक रहे पीड़ित
सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि जिस जिले का विधायक खुद विधानसभा अध्यक्ष है, उसी जिले में नक्सल पीड़ित न्याय के लिए दर-दर भटकने को मजबूर हैं।
अध्यक्ष के निर्देश भी बेअसर
पीड़ितों का आरोप है कि विधानसभा अध्यक्ष के निर्देशों के बावजूद जिला प्रशासन ने अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं की। उनका कहना है कि अधिकारियों के रवैये से उन्हें लगातार निराशा ही हाथ लग रही है।
कलेक्टर-एसपी पर सवाल
पीड़ित परिवारों के मुताबिक कलेक्टर कार्यालय “प्रक्रिया चल रही है” कहकर फाइलों को लंबित रखे हुए है, जबकि एसपी कार्यालय “ऊपर से आदेश” का हवाला देकर जिम्मेदारी से बच रहा है। इस स्थिति ने पीड़ितों की परेशानी और बढ़ा दी है।
लोगों में बढ़ रहा आक्रोश
स्थानीय लोगों का कहना है कि अगर विधानसभा अध्यक्ष के अपने ही जिले में उनके निर्देशों का पालन नहीं हो रहा है, तो यह प्रशासनिक व्यवस्था पर बड़ा सवाल खड़ा करता है।
पीड़ितों की तीन मांगें
लंबित आवेदनों पर तुरंत कार्रवाई नक्सल पीड़ित परिवारों को तत्काल राहत व सुरक्षा आदेशों की अनदेखी करने वाले अधिकारियों पर कार्रवाई
अध्यक्ष निवास जाने की चेतावनी
पीड़ित परिवारों का कहना है कि अगर प्रशासन ने जल्द कदम नहीं उठाए, तो वे अध्यक्ष निवास पहुंचकर अपनी पीड़ा सीधे रखेंगे और अधिकारियों की उदासीनता की जानकारी देंगे।
प्रशासन के सामने बड़ा सवाल
जब विधानसभा अध्यक्ष के अपने ही जिले में पीड़ितों को न्याय के लिए उनके दरबार तक जाने की नौबत आ जाए, तो प्रशासनिक जिम्मेदारी किसकी मानी जाएगी — यह सवाल अब खुलकर उठने लगा है।




