
भिलाई।
श्री शंकराचार्य प्रोफेशनल यूनिवर्सिटी, भिलाई में दिनांक 29 एवं 30 जनवरी 2026 को आंतरिक गुणवत्ता आश्वासन प्रकोष्ठ (IQAC) के तत्वावधान में “रिसर्च डिज़ाइन टू रिसर्च पेपर: कंवर्टिंग मेथोडोलॉजी इनटू मैन्यूस्क्रिप्ट” विषय पर दो दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी का भव्य एवं सफल आयोजन किया गया।
राष्ट्रीय संगोष्ठी के मुख्य अतिथि विश्वविद्यालय के कुलाधिपति श्री आई. पी. मिश्रा रहे, जबकि कार्यक्रम की अध्यक्षता कुलसचिव डॉ. स्मिता सेलट ने की। विशिष्ट अतिथि के रूप में डॉ. श्रुति तिवारी, उप-कुलसचिव (अकादमिक) विशेष रूप से उपस्थित रहीं।
अपने मुख्य उद्बोधन में कुलाधिपति श्री मिश्रा ने कहा कि शोध किसी भी विश्वविद्यालय की अकादमिक आत्मा होता है। उन्होंने कहा कि गुणवत्तापूर्ण शोध के माध्यम से समाज की वास्तविक समस्याओं की पहचान कर उनके व्यावहारिक एवं स्थायी समाधान संभव हैं। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि शोध केवल उपाधि प्राप्त करने का माध्यम न होकर नवाचार, ज्ञान-सृजन एवं सामाजिक उत्तरदायित्व का सशक्त साधन होना चाहिए।
कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए कुलसचिव डॉ. स्मिता सेलट ने कहा कि गुणवत्तापूर्ण शोध के लिए सुदृढ़ शोध-विधि एवं स्पष्ट लेखन शैली अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने ऐसी संगोष्ठियों को शोधार्थियों एवं शिक्षकों के लिए दिशा-निर्देशक बताया।
संगोष्ठी के प्रथम दिवस मुख्य वक्ता के रूप में
डॉ. देवानजली दत्ता, सहायक प्राध्यापक, के.एम. अग्रवाल कला, वाणिज्य एवं विज्ञान महाविद्यालय, मुंबई (ऑनलाइन) तथा
डॉ. लक्ष्मन सोंधी, एसोसिएट प्रोफेसर, मैकेनिकल इंजीनियरिंग विभाग, श्री शंकराचार्य टेक्नीकल कैंपस, भिलाई ने अपने विचार रखे।
डॉ. दत्ता ने कहा कि शोध-विधि की स्पष्टता ही एक प्रभावी एवं प्रकाशित होने योग्य शोध-पत्र की आधारशिला होती है, वहीं डॉ. सोंधी ने शोध-पत्र लेखन में संरचना, भाषा एवं संदर्भों की शुद्धता पर विशेष बल दिया।
द्वितीय दिवस के वक्ताओं में
डॉ. एम. एल. वर्मा, भौतिकी विभाग, श्री शंकराचार्य टेक्नीकल कैंपस, भिलाई तथा
डॉ. अमनदीप सिंह सुरेन्द्र सिंह मंकू, सहायक प्राध्यापक, गुरु नानक महाविद्यालय, मुंबई (ऑनलाइन) शामिल रहे।
डॉ. वर्मा ने कहा कि उत्तम शोध वही है जो वैज्ञानिक दृष्टिकोण पर आधारित हो और जिसके निष्कर्ष समाज व ज्ञान-विकास में उपयोगी सिद्ध हों। डॉ. मंकू ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर स्वीकार्य शोध-पत्र लेखन के लिए स्पष्ट उद्देश्य, सुदृढ़ संरचना एवं मानक संदर्भ प्रणाली के पालन पर जोर दिया।
संपूर्ण कार्यक्रम का आयोजन आईक्यूएसी सेल के समन्वयक डॉ. अजीत पाण्डेय के निर्देशन में तथा डॉ. सुमन पांडेय, सहायक प्राध्यापक, वाणिज्य विभाग के संयोजन में सुव्यवस्थित रूप से संपन्न हुआ।
इस दो दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी में विश्वविद्यालय के सहायक एवं सह-प्राध्यापक, विभिन्न संकायों के सदस्य एवं लगभग 180 शोधार्थियों ने उत्साहपूर्वक सहभागिता की। प्रतिभागियों ने संगोष्ठी को ज्ञानवर्धक, शोध-उन्मुख एवं व्यावहारिक दृष्टि से अत्यंत उपयोगी बताया।
कार्यक्रम का समापन पूजा ठाकुर, सहायक प्रोफेसर, विधि विभाग द्वारा प्रस्तुत धन्यवाद ज्ञापन के साथ हुआ, जिसमें आयोजन को सफल बनाने में सहयोग देने वाले सभी अतिथियों, वक्ताओं, प्रतिभागियों एवं आयोजन समिति के सदस्यों के प्रति आभार व्यक्त किया गया।




