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ग्राम कुसुमकसा में श्रीमद् भागवत ज्ञान यज्ञ का भव्य आयोजन स्व. जयपाल बैस की प्रथम पुण्यतिथि पर आयोजित हो रहा 9 दिवसीय धार्मिक अनुष्ठान

बालोद ( छत्तीसगढ़)

ग्राम कुसुमकसा में पूर्व जनपद सदस्य संजय बैस एवं समस्त बैस परिवार के तत्वावधान में अपने पूज्य पिता स्वर्गीय जयपाल बैस की प्रथम पुण्यतिथि के अवसर पर श्रीमद् भागवत ज्ञान यज्ञ का भव्य आयोजन किया जा रहा है। यह धार्मिक आयोजन 16 दिसंबर से 24 दिसंबर तक आयोजित होगा।

भागवत कथा वाचक पंडित कृष्णकांत शास्त्री

श्रीमद् भागवत ज्ञान यज्ञ सप्ताह के आचार्य सुप्रसिद्ध भागवत कथा वाचक पंडित कृष्णकांत शास्त्री (कवर्धा वाले) हैं, जो अपने ओजस्वी वाणी और भावपूर्ण कथाओं से श्रद्धालुओं को धर्म, संस्कार और जीवन मूल्यों का बोध करा रहे हैं।

“माँ की ममता और पिता की क्षमता का आकलन करने वाला पुत्र नहीं हो सकता”

कथा के तीसरे दिन पंडित कृष्णकांत शास्त्री ने कहा कि

मां की ममता और पिता की क्षमता का जो आकलन करने लग जाए, वह पुत्र नहीं बल्कि कुपुत्र होता है।”

उन्होंने कहा कि माता-पिता का ऋण जीवन भर कभी भी चुकाया नहीं जा सकता।

ईश्वर कृपा से असंभव भी संभव

शास्त्री जी ने कहा कि भगवान की कृपा से दुश्मन भी मित्र बन सकता है और पर्वत जैसी कठिनाइयों को भी पार किया जा सकता है। भगवान से प्रेम उसी तरह करना चाहिए जैसे पुत्र अपने माता-पिता से करता है, तभी जीवन का उद्देश्य सफल होता है।

कर्म का सिद्धांत: जैसा बोओगे वैसा पाओगे

उन्होंने बताया कि यह शाश्वत सत्य है कि मनुष्य जैसा कर्म करता है, वैसा ही फल उसे प्राप्त होता है। प्रेम से व्यवहार करने पर देर-सबेर प्रेम ही वापस मिलता है।

मां के हाथों का भोजन अमृत समान

कथा के दौरान मां अनुसूया और नारद मुनि की प्रेरक कथा का वर्णन करते हुए उन्होंने कहा कि

मां के हाथों का भोजन, ब्राह्मण के हाथों का तिलक और पुत्र के हाथों का पिंडदान हर किसी के भाग्य में नहीं होता।

मां का आंचल ही स्वर्ग है और मां का आशीर्वाद जीवन को सफल बना देता है।

सती अनसूया की महिमा

पंडित शास्त्री ने देवी अनसूया के सतीत्व की महिमा का विस्तार से वर्णन किया, जिसमें तीनों देवियों के अहंकार को समाप्त करने हेतु ब्रह्मा, विष्णु और महेश साधु वेश में भिक्षा मांगने आते हैं। मां अनसूया अपने सतीत्व बल से तीनों देवताओं को शिशु रूप में परिवर्तित कर देती हैं, जिससे देवियां उनके चरणों में नतमस्तक हो जाती हैं।

कुपुत्र बनने की मार्मिक कथा

कथा के दौरान एक आंख वाली मां और कुपुत्र की मार्मिक कथा सुनाकर शास्त्री जी ने समाज को माता-पिता के सम्मान का संदेश दिया। कथा ने उपस्थित श्रद्धालुओं की आंखें नम कर दीं।

शिव-पार्वती विवाह का भावपूर्ण वर्णन

तीसरे दिन की कथा में देवाधिदेव महादेव एवं जगत जननी मां पार्वती के विवाह का सुंदर, भावनात्मक और सचित्र वर्णन किया गया, जिसे सुनकर श्रद्धालु भाव-विभोर हो उठे।

श्रद्धालुओं की उमड़ी भीड़

भागवत कथा में प्रतिदिन बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित होकर कथा श्रवण का पुण्य लाभ अर्जित कर रहे हैं। संपूर्ण वातावरण भक्तिमय बना हुआ है।

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