
सरदार वल्लभभाई पटेल मैदान में चल रहे ब्रज गोपिका सेवा मिशन के प्रवचन कार्यक्रम में स्वामी युगल शरण महाराज ने शनिवार शाम 6 बजे भक्तों को संबोधित करते हुए कहा कि ज्ञान यदि भक्ति से न जुड़ा हो, तो वह मनुष्य में अहंकार बढ़ाता है, और यही अहंकार मानव को भगवान से दूर ले जाता है।

स्वामी जी ने कहा कि दुनिया के सभी जीवों में मनुष्य ही ऐसा प्राणी है जो भगवान की प्राप्ति कर सकता है, क्योंकि उसमें विवेक, सोचने की क्षमता और अच्छे-बुरे का ज्ञान होता है। उन्होंने कबीर और श्रीमद्भगवद्गीता का उदाहरण देते हुए बताया कि सच्चा ज्ञानी भगवान को अत्यंत प्रिय होता है, लेकिन सच्चा ज्ञान प्राप्त करना बहुत कठिन साधना है।
उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि सिर्फ पुस्तकों को याद कर लेना ज्ञान नहीं है। ज्ञान तभी सार्थक होता है जब वह आचरण और व्यवहार में दिखाई दे। यदि ज्ञान में भक्ति नहीं जुड़ती, तो वह गलत दिशा में ले जाकर मनुष्य को घमंडी बना देता है। यही घमंड आध्यात्मिक मार्ग की सबसे बड़ी बाधा है।
अंत में स्वामी जी ने कहा कि ज्ञान और भक्ति दोनों का संगम ही जीवन में वास्तविक परिवर्तन लाता है और मनुष्य को भगवान की ओर अग्रसर करता है।




