छत्तीसगढ़राज्य

मानव सेवा में बढ़ते कदम: जनपद सदस्य मंजू संजय बैंस ने कुपोषित बालिका को लिया गोद

कुसुमकसा, 11 सितंबर 2025:

महिला एवं बाल विकास विभाग के परियोजना चिखालकसा के तहत गंभीर कुपोषित बच्चों को चिन्हांकित कर उन्हें सुपोषित करने के अभियान में जनपद सदस्य मंजू संजय बैंस ने एक प्रेरणादायक कदम उठाया है। उन्होंने कुसुमकसा क्षेत्र के आंगनबाड़ी केंद्र क्रमांक एक की गंभीर कुपोषित बालिका टेवीशा को गोद लिया है।

कुपोषण के खिलाफ अभियान

कुसुमकसा क्षेत्र में 11 बच्चे गंभीर कुपोषित श्रेणी में चिन्हांकित किए गए हैं। आंगनबाड़ी सुपरवाइजर श्वेता श्रीवास्तव ने इन बच्चों को जल्द स्वस्थ और सुपोषित करने के लिए जनप्रतिनिधियों और समाज से सहयोग की अपील की थी। इस अपील पर त्वरित प्रतिक्रिया देते हुए जनपद सदस्य मंजू संजय बैंस ने बालिका टेवीशा, जो गंभीर कुपोषण (वेस्टिंग कैटेगरी) से पीड़ित है, को गोद लेने का निर्णय लिया।

टेवीशा के माता-पिता, यशोदा और राघवेंद्र, अपनी बेटी के स्वास्थ्य को लेकर चिंतित थे। मंजू संजय बैंस ने इस अवसर पर कहा,

“इस बेटी के लिए जितनी चिंता माँ-बाप कर रहे हैं, उतनी ही जिम्मेदारी अब मेरी भी है। मैं डॉक्टरों से चर्चा कर टेवीशा के भोजन में विटामिन, प्रोटीन और अन्य आवश्यक सामग्री उपलब्ध कराऊँगी। मेरा लक्ष्य है कि यह बेटी जल्द सुपोषित हो।”

कुपोषण के खिलाफ सामूहिक प्रयास

मंजू संजय बैंस ने कुसुमकसा क्षेत्र में कुपोषण के खिलाफ एक व्यापक अभियान की योजना बनाई है। उन्होंने कहा,

“हमारे क्षेत्र में 11 बच्चे गंभीर कुपोषित हैं। मैं जल्द ही निजी और सरकारी डॉक्टरों, नर्सों, और मितानिन बहनों के साथ एक बैठक कर कुपोषण के खिलाफ जंग शुरू करूँगी।”

उन्होंने क्षेत्र के सभी जनप्रतिनिधियों और जागरूक नागरिकों से भी इस अभियान में सहयोग करने का आह्वान किया। मंजू ने महिला एवं बाल विकास विभाग की इस योजना को सराहते हुए कहा कि यह बच्चों को स्वस्थ और सुपोषित बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।

नैतिक जिम्मेदारी और स्वस्थ भारत का सपना

मंजू संजय बैंस ने जोर देकर कहा,

“सरकार के साथ-साथ हम सबकी नैतिक जिम्मेदारी है कि बच्चों के कुपोषण को दूर करने में सहयोग करें। बच्चे स्वस्थ और सुपोषित रहेंगे, तभी हम स्वस्थ भारत और स्वस्थ समाज की दिशा में आगे बढ़ पाएंगे।”

उपस्थित गणमान्य व्यक्ति

इस अवसर पर आंगनबाड़ी कार्यकर्ता सीमा पिस्दा, पोषण मित्र शकुंतला साहू, और अन्य गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहे। यह पहल न केवल कुसुमकसा क्षेत्र में कुपोषण के खिलाफ एक मजबूत कदम है, बल्कि मानव सेवा के क्षेत्र में एक प्रेरणादायक उदाहरण भी प्रस्तुत करती है।

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