
1. आर्थिक महाशक्ति की ओर अग्रसर भारत
• प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी के नेतृत्व में भारत विश्व की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनने की दिशा में तेजी से बढ़ रहा है।
• आयकर में ऐतिहासिक छूट के बाद अब जीएसटी स्लैब का सरलीकरण और कर दरों में अभूतपूर्व कमी की गई है।
2. जीएसटी स्लैब में क्रांतिकारी सुधार
• चार स्लैब को घटाकर दो स्लैब कर दिया गया है।
• आवश्यक वस्तुओं पर कर शून्य और कई उत्पादों पर कर 10% तक कम किया गया।
• यह सुधार नवरात्रि से लागू होंगे, जिससे अर्थव्यवस्था को नई गति मिलेगी।
3. आम जनता और व्यापारियों के लिए लाभ
• जनता की बचत में ऐतिहासिक बढ़ोतरी होगी।
• जीएसटी कानूनों का सरलीकरण व्यापारियों के लिए कारोबार को और सुगम बनाएगा।
• उद्योगों को प्रोत्साहन और रोजगार सृजन को बढ़ावा मिलेगा।
4. एक राष्ट्र-एक टैक्स की भावना
• 2017 में 101वें संविधान संशोधन के तहत जीएसटी लागू कर 17 करों और 13 सेस को समाप्त किया गया।
• पहले की जटिल कर प्रणाली को सर# जीएसटी सुधार: आम आदमी के लिए राहत, अर्थव्यवस्था को नई गति
नई दिल्ली, 9 सितंबर 2025: भारत के यशस्वी प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदीजी के नेतृत्व में देश लगातार आर्थिक महाशक्ति बनने की दिशा में अग्रसर है। आयकर में ऐतिहासिक छूट के बाद अब जीएसटी के स्लैब का सरलीकरण और रेट में अभूतपूर्व सुधार से भारत विश्व की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनने की ओर बढ़ चुका है। जीएसटी काउंसिल की 56वीं बैठक में 3 सितंबर 2025 को मंजूर इन सुधारों से चार स्लैब (5%, 12%, 18%, 28%) को घटाकर मुख्य रूप से दो स्लैब (5% और 18%) कर दिया गया है, जबकि सिन गुड्स (जैसे तंबाकू, लग्जरी आइटम) पर 40% की नई दर लागू होगी। कई उपयोगी वस्तुओं पर जीएसटी शून्य हो गया है, जो आम आदमी की जेब पर बोझ कम करेगा।
ये बदलाव नवरात्रि (22 सितंबर 2025) से लागू होंगे, जो मां शक्ति की अराधना के पावन पर्व पर देश को आर्थिक रूप से मजबूत बनाने का संकल्प देंगे। इससे न केवल लोगों की बचत बढ़ेगी, बल्कि व्यापारियों को सरलीकृत कानूनों से अधिक सुगमता मिलेगी। प्रधानमंत्री मोदीजी ने 15 अगस्त 2025 को लाल किले से अपने संबोधन में इन ‘नेक्स्ट-जनरेशन जीएसटी सुधारों’ का आश्वासन दिया था, और मात्र 20 दिनों में जीएसटी काउंसिल ने इसे मंजूरी दे दी।
एक राष्ट्र-एक टैक्स की मजबूत नींव
जैसा कि सभी जानते हैं, मोदीजी ने ‘एक भारत-श्रेष्ठ भारत’ की अवधारणा के तहत अप्रत्यक्ष करों को एकीकृत कर जीएसटी लागू किया। आजादी के बाद से 2017 तक 17 प्रकार के टैक्स और 13 सेस थे, जो राज्य सरकारों की मनमानी से जटिल हो गए थे। प्रत्यक्ष करों में आयकर की दर 97.5% तक पहुंच चुकी थी। अब चार स्लैब के स्थान पर दो स्लैब, शून्य टैक्स वाली वस्तुओं पर छूट और कई उत्पादों पर 10% तक की कमी से अर्थव्यवस्था ‘रामराज्य’ की ओर बढ़ेगी।
जीएसटी 2.0 से दैनिक आवश्यकताओं जैसे पैकेज्ड फूड, इलेक्ट्रॉनिक्स, दवाओं और बीमा पर टैक्स कम होगा। लाइफ और हेल्थ इंश्योरेंस पर जीएसटी शून्य हो गया है। इससे घरेलू खपत बढ़ेगी और जीडीपी में 0.2-0.3% की वृद्धि संभव है।
राज्यों की मजबूती पर मोदीजी का फोकस
मोदीजी, जो स्वयं गुजरात के लंबे समय तक मुख्यमंत्री रहे, राज्यों की समस्याओं से अच्छी तरह वाकिफ हैं। उन्होंने हमेशा राज्यों की चिंता की है। प्रधानमंत्री बनते ही केंद्रीय करों में राज्यों का हिस्सा 32% से बढ़ाकर 42% कर दिया, जो कोरोना के बाद 41% है। छत्तीसगढ़ की आबादी देश की कुल जनसंख्या का 2% से कम है, लेकिन हमें 41% का 3.407% हिस्सा मिलता है। इससे पिछले 10-11 वर्षों में एक लाख करोड़ रुपये से अधिक अतिरिक्त प्राप्त हुए हैं।
विपक्ष की दोहरी राजनीति दुखद
देश को विकसित बनाने के इस यज्ञ में विपक्ष की दोहरी राजनीति दुखद है। जीएसटी काउंसिल में विरोधी दलों के सदस्य टैक्स घटाने का विरोध करते हैं, कहते हैं कि राज्यों को कम पैसे मिलेंगे, लेकिन बाहर आकर वही दल केंद्र पर टैक्स लादने का आरोप लगाते हैं। देश के भविष्य से जुड़े मुद्दों पर ऐसी सस्ती राजनीति उचित नहीं।
विपक्ष का दुष्प्रचार कि ये सुधार अमेरिकी टैरिफ से जुड़े हैं, पूरी तरह झूठा और बचकाना है। इसकी शुरुआत डेढ़ वर्ष पहले हो चुकी थी, जब टीम गठित हुई और मंथन शुरू हुआ। किसी विदेशी प्रभाव का इससे कोई लेना-देना नहीं।
कांग्रेस इस मामले में कन्फ्यूज है। कभी सुधार का श्रेय लेने की कोशिश, तो कभी ‘गब्बर सिंह टैक्स’ कहकर मजाक। अब जीएसटी ‘गुड एंड सिंपल टैक्स’ बन चुका है।
जीएसटी काउंसिल: संघवाद का उत्कृष्ट मॉडल
जीएसटी काउंसिल संघ-राज्य संबंधों का बेहतरीन लोकतांत्रिक मॉडल है, जहां निर्णय 75% बहुमत से होते हैं और ज्यादातर सर्वसम्मति से। दो-तिहाई वोट राज्यों के होते हैं, सभी वित्त मंत्री सदस्य हैं। केंद्रीय वित्त मंत्री श्रीमती निर्मला सीतारमण की अध्यक्षता में यह काउंसिल लोकतांत्रिक संघवाद का प्रतीक है। छत्तीसगढ़ के वित्त मंत्री ओ.पी. चौधरी जी ने भी इसमें महत्वपूर्ण योगदान दिया।
ये सुधार एक नए आर्थिक युग का सूत्रपात हैं, इन्हें सस्ती राजनीति का शिकार नहीं बनाना चाहिए। प्रधानमंत्री मोदीजी का अभिनंदन!
सस्ती हुई प्रमुख उत्पादों की सूची
• 0% जीएसटी (पूरी छूट): लाइफ एंड हेल्थ इंश्योरेंस, कई फूड आइटम्स (पनीर, भारतीय ब्रेड, दूध उत्पाद), जीवन रक्षक दवाएं, बायोपेस्टीसाइड्स, शिक्षा सामग्री (नोटबुक, पेंसिल, ग्लोब्स)।
• 5% जीएसटी: पैकेज्ड फूड, साबुन, टूथपेस्ट, दवाएं, मेडिकल डिवाइसेस, छोटे वाहन (इलेक्ट्रिक व्हीकल्स), ट्रैक्टर, बायोफ्यूल, बिल्डिंग मटेरियल्स (सीमेंट, स्टील)।
• 18% जीएसटी: अधिकांश उपभोक्ता वस्तुएं, इलेक्ट्रॉनिक्स (टीवी, वॉशिंग मशीन, एसी), मोटरसाइकिल्स (350cc तक), ऑटो कंपोनेंट्स, मूवी टिकट्स।
• 40% जीएसटी: सिन गुड्स (तंबाकू, सिगरेट, कार्बोनेटेड ड्रिंक्स), लग्जरी आइटम्स (प्रीमियम कारें, बाइक्स, यॉट्स, हेलीकॉप्टर्स), कैसिनो/गेमिंग सर्विसेज।
ये सुधार त्योहारों से पहले उपभोक्ताओं के लिए बड़ी राहत लेकर आएंगे, जो अर्थव्यवस्था को गति देंगे। (संलग्न: पूर्ण सूची के लिए जीएसटी काउंसिल वेबसाइट देखें।)




