
छत्तीसगढ़ प्रदेश एनएचएम कर्मचारी संघ द्वारा नियमितीकरण, ग्रेड पे, 27% वेतन वृद्धि सहित 10 सूत्रीय मांगों को लेकर चल रहा अनिश्चितकालीन आंदोलन 29वें दिन भी तेजी से जारी रहा। आज कर्मचारियों ने एक अनूठा कदम उठाते हुए इच्छा मृत्यु की मांग के लिए हस्ताक्षर अभियान शुरू किया। इस अभियान के पूर्ण होने के बाद कर्मचारी राज्यपाल को इच्छा मृत्यु का पत्र सौंपेंगे।
कर्मचारियों का कहना
कर्मचारियों का कहना है कि राज्य में स्वास्थ्य व्यवस्था पूरी तरह चरमरा गई है, लेकिन शासन स्तर पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं की जा रही। उन्हें बार-बार केवल आश्वासन दिए जा रहे हैं। कर्मचारी नेताओं ने स्पष्ट किया कि इस बार हड़ताल आश्वासनों पर नहीं, बल्कि ठोस आदेश जारी होने पर ही स्थगित होगी।
बालोद में निःशुल्क स्वास्थ्य जांच शिविर
आज बालोद बस स्टैंड पर एनएचएम कर्मचारियों ने निःशुल्क स्वास्थ्य जांच के लिए ओपीडी सेवा शुरू की, जिसमें मरीजों को मुफ्त दवाइयां भी वितरित की गईं। यह कदम जनता के प्रति उनकी प्रतिबद्धता को दर्शाता है, भले ही वे हड़ताल पर हों।
हड़ताल से प्रभावित सेवाएं
हड़ताल के कारण ग्रामीण स्वास्थ्य सेवाएं बुरी तरह प्रभावित हुई हैं:
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आयुष्मान आरोग्य मंदिर: ग्रामीण क्षेत्रों में ओपीडी सेवाएं पूरी तरह बंद हैं।
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सीएससी और जिला अस्पताल: मरीजों की संख्या में भारी वृद्धि, जिससे नियमित कर्मचारियों पर काम का बोझ बढ़ गया है।
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पोषण पुनर्वास केंद्र: बंद होने से कुपोषण से संबंधित सेवाएं प्रभावित।
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स्कूल और आंगनवाड़ी: स्वास्थ्य जांच पूरी तरह ठप।
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टीबी, नवजात शिशु देखभाल, वृद्ध स्वास्थ्य परीक्षण, और एनसीडी स्क्रीनिंग: सभी सेवाएं गंभीर रूप से प्रभावित।
हड़ताल में शामिल प्रमुख कर्मचारी
हड़ताल में जिला अध्यक्ष खिलेश साहू, उपाध्यक्ष प्रेम, संरक्षक दिनेश खर्कवाल, मीडिया प्रभारी चंदन गिरी, और अन्य कर्मचारी जैसे मनोज, सुशील, रविभूषण, रूपेश ठाकुर, हेम कुमारी, धनेश साहू, लंकेश्वर साहू, डॉ. डी. सी. जैन, हरिशंकर, मिथलेश, मोनिका, नागेश्वरी, अंचल, साधना, प्रीति, निर्मल, ओमेश्वरी, गीतांजलि, चंद्रशिला, कीर्तन, सत्यवती, दिशा, गोपीराम, सोनाली, शिवानी, पल्लवी, अंजना, उर्वशी, मुनेश्वरी, झनक, दीपशिखा, मुकेश देवांगन, निरूपा, मोतिम, खुशबू, वेदगंगा, रोशनी, किरण, कामिनी, देविका, और अल्पना कलिहारी सहित कई अन्य कर्मचारी शामिल थे।
आंदोलन की व्यापकता
प्रदेशभर में 16,000 से अधिक एनएचएम संविदा कर्मचारी इस आंदोलन में शामिल हैं। कर्मचारियों का कहना है कि जब तक उनकी मांगें पूरी नहीं होतीं, वे हड़ताल जारी रखेंगे।




