
6 सितंबर 2025 को, छत्तीसगढ़ के बालोद जिले में राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (एनएचएम) के कर्मचारियों ने अपनी अनिश्चितकालीन हड़ताल के 20वें दिन एक अनोखा विरोध प्रदर्शन किया। छत्तीसगढ़ प्रदेश एनएचएम कर्मचारी संघ के बैनर तले कर्मचारियों ने संविदा प्रथा को “संविदासुर” नामक राक्षस के रूप में चित्रित किया। इस प्रतीकात्मक राक्षस को बस स्टैंड परिसर में घुमाया गया और फिर उसका दहन किया गया। कर्मचारियों का कहना है कि संविदा प्रथा उनके जीवन में राक्षस से कम नहीं है, जो उनकी आर्थिक और सामाजिक सुरक्षा को नष्ट कर रही है।
इस अवसर पर, कर्मचारियों ने गणेश विसर्जन के दिन भगवान गणेश से प्रार्थना की कि वे इस “संविदासुर” को उनके जीवन से हमेशा के लिए समाप्त करें। उन्होंने कहा, “गणेश जी, आप अगले बरस जल्दी आना, लेकिन इस संविदासुर को हम एनएचएम कर्मियों से सदा के लिए समाप्त कर देना।”

कर्मचारियों की मांगें
एनएचएम कर्मचारी अपनी 10 सूत्रीय मांगों को लेकर 18 अगस्त 2025 से हड़ताल पर हैं। इन मांगों में शामिल हैं:
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नियमितीकरण/संविलियन: संविदा कर्मचारियों को स्थायी करना।
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ग्रेड पे का निर्धारण: नियमित कर्मचारियों के समान वेतन संरचना।
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27% वेतन वृद्धि: घोषित वेतन वृद्धि का कार्यान्वयन।
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कार्य मूल्यांकन में पारदर्शिता: निष्पक्ष और पारदर्शी प्रदर्शन मूल्यांकन।
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महिला कर्मचारियों के लिए विशेष अवकाश: मातृत्व और अन्य जरूरतों के लिए अवकाश।
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पब्लिक हेल्थ कैडर की स्थापना: स्वास्थ्य सेवाओं में विशेष कैडर का गठन।
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नियमित भर्ती में आरक्षण कोटा: संविदा कर्मचारियों के लिए प्राथमिकता।
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चिकित्सा अवकाश और अन्य लाभ: नियमित कर्मचारियों जैसे लाभ।
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स्थानांतरण नीति में स्पष्टता: पारदर्शी स्थानांतरण प्रक्रिया।
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न्यूनतम 10 लाख रुपये का चिकित्सा बीमा: सभी कर्मचारियों के लिए स्वास्थ्य बीमा।
सरकार पर टूटे वादों का आरोप
कर्मचारियों ने आरोप लगाया कि भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) ने अपने 2023 विधानसभा चुनाव घोषणा पत्र “मोदी की गारंटी” में वादा किया था कि 100 दिनों में एक समिति गठित कर कर्मचारियों की समस्याओं का समाधान किया जाएगा और नियमितीकरण किया जाएगा। हालांकि, 20 महीने से अधिक समय बीत जाने के बाद भी कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। कर्मचारियों ने कहा, “हमें समिति और आश्वासन नहीं, ठोस आदेश चाहिए।”
स्वास्थ्य सेवाओं पर प्रभाव
हड़ताल के कारण छत्तीसगढ़ में स्वास्थ्य सेवाएं बुरी तरह प्रभावित हुई हैं। विशेष रूप से ग्रामीण क्षेत्रों में सामुदायिक स्वास्थ्य अधिकारी (CHO) के हड़ताल पर होने से आयुष्मान आरोग्य मंदिरों में ओपीडी सेवाएं पूरी तरह ठप हैं। प्रभावित सेवाओं में शामिल हैं:
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शासकीय अस्पतालों में संस्थागत प्रसव
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पैथोलॉजी जांच (खून, पेशाब, ट्रू-नाट, सीबीनाट)
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टीबी, कुष्ठ, और मलेरिया जांच
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ओपीडी सेवाएं
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नवजात शिशु देखभाल
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स्कूल और आंगनवाड़ी स्वास्थ्य परीक्षण
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पोषण पुनर्वास केंद्र
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गैर-संचारी रोग (एनसीडी) स्क्रीनिंग
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वृद्ध स्वास्थ्य परीक्षण
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आपातकालीन सेवाएं
सरकार का रुख और कार्रवाई
राज्य सरकार ने हड़ताल को जनहित के खिलाफ बताते हुए सख्त कदम उठाए हैं। 3 सितंबर 2025 को, स्वास्थ्य विभाग ने हड़ताल का नेतृत्व कर रहे 25 कर्मचारियों की सेवाएं समाप्त कर दीं, जिनमें छत्तीसगढ़ प्रदेश एनएचएम कर्मचारी संघ के अध्यक्ष डॉ. अमित मिरी, महासचिव कौशिलेश तिवारी, और संरक्षक हेमंत कुमार सिन्हा शामिल हैं। सरकार ने “नो वर्क, नो पे” नीति लागू की और अनुपस्थित कर्मचारियों को कारण बताओ नोटिस जारी किए। स्वास्थ्य सचिव अमित कटारिया ने 29 अगस्त को अंतिम नोटिस जारी कर कर्मचारियों को काम पर लौटने की चेतावनी दी थी।
13 अगस्त को आयोजित स्टेट हेल्थ सोसाइटी की बैठक में 10 में से 5 मांगों पर सहमति बन चुकी थी, और तीन अन्य मांगों (ग्रेड पे, करुणामूलक नियुक्ति, स्थानांतरण नीति) की जांच के लिए एक समिति गठित की गई है। शेष तीन मांगें—नियमितीकरण, पब्लिक हेल्थ कैडर, और नियमित भर्ती में आरक्षण—उच्चतम सरकारी स्तर पर विचाराधीन हैं।
सामूहिक इस्तीफा और समर्थन
25 कर्मचारियों की बर्खास्तगी के विरोध में, 14,678 एनएचएम कर्मचारियों ने सामूहिक रूप से इस्तीफा दे दिया है। कर्मचारी संघ के संरक्षक हेमंत कुमार सिन्हा ने कहा, “यह दमनकारी कार्रवाई पूरी तरह अनुचित है और संवाद में बाधा डालती है। हमारी हड़ताल तब तक जारी रहेगी जब तक मांगें पूरी नहीं होतीं।”
बालोद जिले के पेंशनर्स कल्याण संघ ने कर्मचारियों का समर्थन किया और उनकी मांगों को जायज बताया। इसके अलावा, सांसद विजय बघेल और बृजमोहन अग्रवाल ने भी कर्मचारियों की मांगों का समर्थन किया है। अग्रवाल ने मुख्यमंत्री, स्वास्थ्य मंत्री, और यदि आवश्यक हो तो केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जे.पी. नड्डा से बात करने का आश्वासन दिया है।
राजनीतिक प्रतिक्रिया
हड़ताल ने छत्तीसगढ़ में राजनीतिक उथल-पुथल मचा दी है। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व उपमुख्यमंत्री टी.एस. सिंह देव ने नियमितीकरण न होने को पिछले विधानसभा चुनाव में कांग्रेस की हार का एक प्रमुख कारण बताया। कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष दीपक बैज ने सरकार पर कर्मचारियों की आवाज दबाने और जेल भेजने की धमकी देने का आरोप लगाया। दूसरी ओर, स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल ने हड़ताल को अनुचित ठहराते हुए कर्मचारियों से काम पर लौटने की अपील की।
बालोद में हड़ताल के प्रमुख चेहरे
हड़ताल में बालोद जिले के प्रमुख कर्मचारी शामिल थे, जिनमें जिला अध्यक्ष खिलेश साहू, उपाध्यक्ष प्रेम, संरक्षक दिनेश खर्कवाल, मीडिया प्रभारी चंदन गिरी, और अन्य सदस्य जैसे डॉ. दीप्ति साहू, रोहित, लोकेश, सरिता देवांगन, तोश, डॉ. रीती प्रभा बेलचंदन, डॉ. इंद्र चंद्राकर, रजनी, पूर्वी, आकांक्षा, किरण, पीयूष, लोकेंद्र, रोशनी, सुनील, जीतेश्वरी साहू, और रामेश्वरी शामिल थे।
निष्कर्ष
छत्तीसगढ़ में 16,000 से अधिक एनएचएम कर्मचारियों की हड़ताल ने स्वास्थ्य सेवाओं को ठप कर दिया है, खासकर ग्रामीण क्षेत्रों में। कर्मचारियों की मांगें जायज हैं, लेकिन सरकार की सख्त कार्रवाई और संवाद की कमी ने स्थिति को और जटिल बना दिया है। यह देखना बाकी है कि क्या सरकार और कर्मचारी संघ के बीच कोई सकारात्मक समाधान निकल पाएगा।




