छत्तीसगढ़राज्य

कुसुमकसा में तीज पर्व पर सुहागिन बहनों को करू भात खिलाकर श्रृंगार सामग्री भेंट की गई

कुसुमकसा

ग्राम पंचायत कुसुमकसा में तीज पर्व के अवसर पर एक भव्य आयोजन किया गया, जिसमें सभी उपवास रखने वाली सुहागिन बहनों को करू भात खिलाया गया और श्रृंगार सामग्री उपहार स्वरूप भेंट की गई। इस कार्यक्रम का आयोजन ग्राम पंचायत के सरपंच, पंच प्रतिनिधियों और गणमान्य नागरिकों के सहयोग से किया गया। जनपद सदस्य मंजू संजय बैंस ने सभी सुहागिन बहनों को श्रृंगार सामग्री वितरित की।

कार्यक्रम का शुभारंभ

कार्यक्रम की शुरुआत भगवान भोलेनाथ की महाआरती के साथ हुई, जिसमें जनपद सदस्य मंजू संजय बैंस, सरपंच वेद बाई पिस्दा, और पंच प्रतिनिधियों सहित सभी उपस्थित लोगों ने भाग लिया। आरती के पश्चात सभी बहनों को प्रसाद के रूप में करू भात खिलाया गया। आयोजन समिति के संरक्षक शंकर पिस्दा ने तीज पर्व के महत्व को विस्तार से समझाया और इस परंपरा की महत्ता पर प्रकाश डाला।

जनपद सदस्य का उद्बोधन

मुख्य अतिथि जनपद सदस्य मंजू संजय बैंस ने अपने उद्बोधन में सभी बहनों को तीज पर्व की शुभकामनाएं दीं। उन्होंने कहा, “हर वर्ष मैं तीज पर्व मनाने अपने मायके जाती थी, लेकिन इस वर्ष मुझे अपने जनपद क्षेत्र की बहनों के साथ तीज मनाने का सौभाग्य प्राप्त हुआ है। करू भात खिलाने की परंपरा हमारे गांव में कई वर्षों से चली आ रही है, और आयोजन समिति के भाइयों द्वारा हर साल इसे और बेहतर बनाया जाता है। उनकी प्रशंसा के लिए शब्द कम पड़ते हैं।”

उन्होंने आगे कहा, “तीज पर्व सुहागिन बहनों के लिए सबसे बड़ा पर्व है। जिस प्रकार मां पार्वती ने भगवान शिव को पाने के लिए व्रत रखा था, उसी तरह हम भी अपने पति की दीर्घायु और मंगल कामना के लिए यह व्रत रखते हैं। मेरे पति देव द्वारा शुरू की गई परंपरा को निभाते हुए, मैं सभी बहनों को सुहाग का प्रतीक श्रृंगार सामग्री भेंट कर रही हूं।”

सामाजिक एकता का प्रतीक

पूर्व जनपद सदस्य संजय बैंस ने अपने संबोधन में कहा, “आज हमारे गांव की सैकड़ों बहनें एक साथ बैठकर भोजन प्रसाद ग्रहण कर रही हैं। इस आयोजन ने पुरानी सहेलियों को एक स्थान पर मिलने का अवसर प्रदान किया है, जो हमारे गांव का एक अनूठा आयोजन है।”

आयोजन समिति और सहयोगी

कार्यक्रम का संचालन नंद किशोर पिस्दा ने किया, जबकि आभार प्रदर्शन मंजू धनकर ने किया। इस आयोजन को सफल बनाने में डॉ. भूपेंद्र मिश्रा, उप सरपंच नितिन जैन, दीपक यादव, संतोष जैन, खेमिन निर्मलकार, मोनू गुप्ता, कमलकांत साहू, मनीष जेठवानी, मोती कुचेरिया, सुरेश कोठारी, गोविंद सिन्हा, डॉ. नसीम खान, मंदिर पुजारी लखन गिरी गोस्वामी, मोहन दास मानिकपुरी, राय सिंग लेडिया, सोमनाथ रावते, हरि राम, रवि यादव सहित गांव के कई गणमान्य व्यक्तियों ने महत्वपूर्ण योगदान दिया।

निष्कर्ष

यह आयोजन न केवल तीज पर्व के उत्सव का हिस्सा था, बल्कि सामाजिक एकता और परंपराओं के निर्वहन का भी प्रतीक बना। ग्रामवासियों ने इस आयोजन को यादगार बनाने में कोई कसर नहीं छोड़ी, और सभी ने मिलकर इसे सफल बनाया।

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