छत्तीसगढ़

ग्राम बघमरा की महिलाओं ने तिरंगा निर्माण से जोड़ा आजीविका का नया अध्याय

बघमरा, 11 अगस्त 2025:

हर घर तिरंगा अभियान को ग्राम बघमरा की महिलाओं ने न केवल देशभक्ति से जोड़ा, बल्कि इसे अपनी आजीविका का सशक्त माध्यम भी बना लिया है। यहां की चार स्व-सहायता समूहों—जय कपिलेश्वर, सहेली, नवज्योति और अम्बे—की 20 महिलाएं दिन-रात तिरंगा झंडे बनाने में जुटी हैं। अब तक ये महिलाएं 6,000 से अधिक तिरंगे तैयार कर चुकी हैं, जिनकी बिक्री से उन्हें लगभग 2 लाख रुपये की आय प्राप्त हुई है। प्रत्येक झंडा 35 रुपये में बिक रहा है, जो इन महिलाओं और उनके परिवारों की आर्थिक स्थिति को मजबूत कर रहा है।

सिलाई मशीनों से सिल रही देशभक्ति

सोमवार शाम 4 बजे जय कपिलेश्वर समूह की तीजन बाई ने बताया, “हमारी सिलाई मशीनें लगातार चल रही हैं। हर झंडे में हम देश के प्रति सम्मान और प्यार सिलते हैं। यह काम हमें आर्थिक मजबूती के साथ-साथ देशसेवा का गर्व भी दे रहा है।” सहेली समूह की देवकी विश्वकर्मा ने कहा, “पहले हम छोटे-मोटे काम करते थे, लेकिन तिरंगा निर्माण ने हमें नई पहचान दी है। इस कमाई से हम अपने बच्चों की पढ़ाई और घर की जरूरतें पूरी कर पा रहे हैं।”

गर्व के साथ लहरा रहे तिरंगे

नवज्योति समूह की सरोजनी साहू ने गर्व से कहा, “जब हमारे बनाए तिरंगे गांव और जिले में लहराते हैं, तो हमें गर्व महसूस होता है। हम चाहते हैं कि हर घर में तिरंगा लहराए।” ये महिलाएं तिरंगे की गुणवत्ता का विशेष ध्यान रखती हैं। केसरिया, सफेद और हरे रंग को सिलाई मशीनों से जोड़कर वे तिरंगे तैयार करती हैं, जो देशभक्ति का प्रतीक बन रहे हैं।

आत्मनिर्भरता की प्रेरणा

बघमरा की इन महिलाओं की मेहनत न केवल उनकी आर्थिक स्थिति को बेहतर बना रही है, बल्कि गांव की अन्य महिलाओं के लिए भी प्रेरणा का स्रोत बन रही है। बिहान की संकुल प्रभारी सुनीता खुंटे ने जिलेवासियों से अपील की है कि वे हर घर तिरंगा अभियान में सक्रिय रूप से भाग लें और इन महिलाओं के प्रयासों को समर्थन दें।

यह पहल न केवल आर्थिक सशक्तिकरण का उदाहरण है, बल्कि देशभक्ति और आत्मनिर्भरता का एक अनूठा संगम भी है। बघमरा की महिलाएं तिरंगा बनाकर न सिर्फ अपनी जिंदगी संवार रही हैं, बल्कि पूरे समुदाय को एक नई दिशा दिखा रही हैं।

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