छत्तीसगढ़राज्य

छत्तीसगढ़ में NHM कर्मचारियों की अनिश्चितकालीन हड़ताल: स्वास्थ्य सेवाएं ठप, तीज पर हड़ताल स्थल पर करु भात

बालोद, 25 अगस्त 2025

छत्तीसगढ़ में राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (NHM) के 16,000 से अधिक संविदा कर्मचारी अपनी 10 सूत्रीय मांगों को लेकर 18 अगस्त से अनिश्चितकालीन हड़ताल पर हैं। इस आंदोलन में बालोद जिले के सभी NHM कर्मचारी भी शामिल हैं, जो प्रतिदिन धरना स्थल पर अपनी आवाज बुलंद कर रहे हैं। कर्मचारियों की प्रमुख मांगों में नियमितीकरण/संविलियन, ग्रेड पे का निर्धारण, 27% लंबित वेतन वृद्धि, पब्लिक हेल्थ कैडर की स्थापना, कार्य मूल्यांकन में पारदर्शिता, अनुकंपा नियुक्ति, मेडिकल व अन्य अवकाश, स्थानांतरण नीति, और न्यूनतम 10 लाख का कैशलेस चिकित्सा बीमा शामिल हैं।

तीज के त्योहार पर हड़ताल स्थल पर करु भात

25 अगस्त को तीज के अवसर पर, NHM की संविदा महिला कर्मचारियों ने हड़ताल स्थल पर ही करु भात खाकर अपने उपवास की शुरुआत की। तीज छत्तीसगढ़ में महिलाओं के लिए एक महत्वपूर्ण लोक आस्था का त्योहार है, जिसमें महिलाएं 36 घंटे का उपवास रखती हैं। लेकिन शासन की उदासीनता के कारण, इन कर्मचारियों को बस स्टैंड के हड़ताल स्थल पर मजबूरी में यह रस्म निभानी पड़ी। महिला कर्मचारियों ने कहा कि वे उम्मीद करती हैं कि सरकार उनकी मांगों पर विचार कर उन्हें तीज के उपहार के रूप में शीघ्र पूरा करेगी। साथ ही, कर्मचारियों ने अपनी मांगों को रंगोली के माध्यम से प्रदर्शित कर विरोध जताया।

स्वास्थ्य सेवाओं पर गहरा असर

NHM कर्मचारी पिछले 20 वर्षों से छत्तीसगढ़ के सुदूर क्षेत्रों से लेकर शासकीय अस्पतालों तक स्वास्थ्य सेवाओं की रीढ़ बने हुए हैं। ये कर्मचारी संस्थागत प्रसव, पैथोलॉजी जांच (खून, पेशाब, ट्रू-नाट, सीबीनाट), टीबी, कुष्ठ, मलेरिया जांच, ओपीडी, नवजात शिशु देखभाल (SNCU), स्कूल-आंगनबाड़ी स्वास्थ्य परीक्षण (चिरायु RBSK), पोषण आहार वितरण, एनसीडी स्क्रीनिंग, वृद्ध स्वास्थ्य परीक्षण, और आपातकालीन सेवाओं का संचालन करते हैं।

हड़ताल के कारण ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाएं लगभग ठप हो चुकी हैं। कई अस्पतालों और उप-स्वास्थ्य केंद्रों में ताले लटक गए हैं, रात्रिकालीन प्रसव सेवाएं और ऑपरेशन थिएटर पूरी तरह बंद हैं। मरीजों को इलाज के लिए भटकना पड़ रहा है, और कई को निजी अस्पतालों का सहारा लेना पड़ रहा है। विशेष रूप से SNCU, ब्लड बैंक, और लैब सेवाएं प्रभावित होने से नवजात शिशुओं और गंभीर मरीजों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।

सरकार पर टूटा “मोदी की गारंटी” का वादा

कर्मचारियों ने आरोप लगाया कि भाजपा के 2023 के चुनावी घोषणा पत्र में “मोदी की गारंटी” के तहत संविदा कर्मचारियों के नियमितीकरण का वादा किया गया था। इसके बावजूद, पिछले 20 महीनों में 160 से अधिक बार ज्ञापन सौंपने के बाद भी कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। छत्तीसगढ़ प्रदेश NHM कर्मचारी संघ के अध्यक्ष डॉ. अमित मिरी ने कहा, “हमने कोविड-19 महामारी सहित हर आपातकाल में अपनी जान जोखिम में डालकर सेवाएं दीं, लेकिन सरकार हमारी मूलभूत मांगों को अनदेखा कर रही है।”

आंदोलन और चेतावनी

हड़ताल के छठे दिन, रायपुर के तूता धरना स्थल पर कर्मचारियों ने हवन और सुंदरकांड का आयोजन कर सरकार को “सद्बुद्धि” देने की प्रार्थना की। कोरबा में कर्मचारियों ने मुख्यमंत्री और स्वास्थ्य मंत्री को खून से पत्र लिखकर अपनी मांगों की ओर ध्यान आकर्षित किया। रायगढ़ में शहीद विप्लव त्रिपाठी स्टेडियम में 300 से अधिक कर्मचारियों ने धरना दिया, और नारायणपुर में 245 कर्मचारी आंदोलन में शामिल हुए।

संघ के पदाधिकारियों ने चेतावनी दी है कि यदि सरकार ने शीघ्र मांगों पर लिखित आदेश जारी नहीं किए, तो हड़ताल और उग्र होगी, जिससे प्रदेश की स्वास्थ्य व्यवस्था पूरी तरह चरमरा सकती है। उन्होंने जनता से असुविधा के लिए खेद जताते हुए शासन को इस स्थिति का जिम्मेदार ठहराया।

निष्कर्ष

NHM कर्मचारियों की हड़ताल ने छत्तीसगढ़ की स्वास्थ्य सेवाओं को गहरे संकट में डाल दिया है। सरकार और कर्मचारी संगठन के बीच संवाद की कमी और ठोस कार्रवाई न होने से यह आंदोलन और तेज हो रहा है। कर्मचारियों की मांगें जायज हैं, और यह देखना बाकी है कि सरकार कब और कैसे इस मुद्दे का समाधान करती है।

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