
राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (एनएचएम) के कर्मचारियों ने छत्तीसगढ़ सरकार की बेरुखी और उनकी मांगों पर ठोस कार्रवाई न होने के विरोध में आज, 18 अगस्त 2025 से अनिश्चितकालीन हड़ताल शुरू कर दी है। इस आंदोलन में प्रदेशभर के 16,000 से अधिक एनएचएम कर्मचारी शामिल हैं, जिससे राज्य की स्वास्थ्य सेवाएं बेपटरी होने की कगार पर पहुंच गई हैं।

हड़ताल का आगाज
छत्तीसगढ़ प्रदेश एनएचएम कर्मचारी संघ के नेतृत्व में बालोद जिला मुख्यालय के बस स्टैंड पर अनिश्चितकालीन हड़ताल शुरू हुई। कार्यक्रम की शुरुआत में दिवंगत कर्मचारियों को श्रद्धांजलि अर्पित की गई। हड़ताल में जिला अध्यक्ष खिलेश साहू, संरक्षक दिनेश खर्कवाल, उपाध्यक्ष प्रेम कुमार यादव, महिला विंग से झरना नामदेव, सीएचओ प्रकोष्ठ से श्रीमती दिव्या जगनायक, आरबीएसके से डॉ. इंद्र चंद्राकर, बीपीएम प्रकोष्ठ से योगेश साहू सहित एनएचएम के सभी कर्मचारी मौजूद रहे।
कर्मचारियों की मांगें
एनएचएम कर्मचारी संघ ने सरकार के समक्ष निम्नलिखित प्रमुख मांगें रखी हैं:
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संविलियन/स्थायीकरण: कर्मचारियों का नियमितीकरण।
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पब्लिक हेल्थ कैडर की स्थापना: स्वास्थ्य सेवाओं के लिए विशेष कैडर।
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ग्रेड पे का निर्धारण: वेतन संरचना में सुधार।
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कार्य मूल्यांकन में पारदर्शिता: निष्पक्ष और पारदर्शी मूल्यांकन प्रणाली।
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27% वेतन वृद्धि: लंबित वेतन वृद्धि का भुगतान।
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नियमित भर्ती में आरक्षण: एनएचएम कर्मचारियों के लिए आरक्षित सीटें।
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अनुकंपा नियुक्ति: मृत कर्मचारियों के आश्रितों के लिए नियुक्ति।
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मेडिकल और अन्य अवकाश: बेहतर अवकाश सुविधाएं।
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स्थानांतरण नीति: निष्पक्ष और पारदर्शी नीति।
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10 लाख कैशलेस चिकित्सा बीमा: कर्मचारियों के लिए स्वास्थ्य बीमा।
20 वर्षों की उपेक्षा
पिछले 20 वर्षों से एनएचएम कर्मचारी छत्तीसगढ़ के सुदूर क्षेत्रों से लेकर प्रमुख शासकीय संस्थानों तक स्वास्थ्य सेवाओं की रीढ़ बने हुए हैं। कोविड-19 महामारी जैसे संकट में इनकी भूमिका अतुलनीय रही। फिर भी, उन्हें मूलभूत सुविधाओं से वंचित रखा गया है, जबकि अन्य राज्यों में एनएचएम कर्मचारियों को बेहतर सुविधाएं मिल रही हैं।
आपातकालीन सेवाएं भी बंद
इस बार हड़ताल में विशेष नवजात शिशु देखभाल इकाई (एसएनसीयू) सहित आपातकालीन सेवाएं भी पूरी तरह बंद रहेंगी। संघ ने इसकी सूचना पहले ही सरकार को दे दी है। प्रदेशाध्यक्ष डॉ. अमित कुमार मिरी, महासचिव कौशलेश तिवारी, डॉ. रविशंकर दीक्षित, पूरन दास, हेमंत सिन्हा, श्याम मोहन दुबे और प्रफुल्ल कुमार ने संयुक्त बयान में कहा कि सरकार की उदासीनता और अड़ियल रवैये ने कर्मचारियों को यह कदम उठाने के लिए मजबूर किया है।
राजनीतिक वादे और हकीकत
संघ के प्रवक्ता पूरन दास ने बताया कि मौजूदा सरकार के कई वरिष्ठ नेता, जैसे विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह, उपमुख्यमंत्री अरुण साव, विजय शर्मा, वित्त मंत्री ओ.पी. चौधरी और वन मंत्री केदार कश्यप ने पहले कर्मचारियों के मंचों पर समर्थन का आश्वासन दिया था। छत्तीसगढ़ में “मोदी की गारंटी” चुनावी घोषणा पत्र में भी नियमितीकरण का वादा किया गया। हालांकि, पिछले 20 महीनों में 160 से अधिक बार ज्ञापन और आवेदन देने के बावजूद कोई समाधान नहीं निकला।

स्वास्थ्य सेवाओं पर संकट
कर्मचारी संघ ने चेतावनी दी है कि यदि सरकार तत्काल संवाद शुरू कर उनकी जायज मांगों पर निर्णय नहीं लेती, तो छत्तीसगढ़ की स्वास्थ्य सेवाएं पूरी तरह ठप हो सकती हैं। इसकी पूरी जिम्मेदारी सरकार की होगी।
सरकार से अपील
एनएचएम कर्मचारी संघ ने सरकार से तत्काल वार्ता शुरू करने और मांगों पर विचार करने की अपील की है, ताकि स्वास्थ्य सेवाओं को सुचारू रखा जा सके।




